सशक्त नीव के रास्ते पर

By November 27, 2018blogs

“एक सशक्त नीव पर ही एक बुलंद इमारत तैयार की जाती है| यदि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के भाषाई कौशल और समझ को विकसित कर दिया जाए तो वे अन्य विषयों को भी आसानी से समझने के लिए तैयार हो जाते हैं|
जल्दबाज़ी न करते हुए, शिक्षा की हर इकाई को जोड़ते हुए – अभिभावकों, विभागीय अधिकारियों एवं ग्राम प्रतिनिधियों से निरंतर संपर्क करके इन सभी समस्याओं का हल ढूँढा और स्कूल को सुचारू रूप से विकसित किया| जहाँ 2 साल पहले इस विद्यालय में केवल 10 से 12 बच्चे थे आज यहाँ 30 बच्चे नामांकित है|
अब बच्चों और स्कूल का विकास देख पालक भी उत्साहित हैं और यही वजह है कि अब बच्चों की उपस्थिति अधिकांशतः पूरी रहती है| यदि बच्चे को स्कूल न आना हो तो पालक स्कूल में जानकारी देकर बच्चे की छुट्टी करवाते हैं|
बच्चों का कक्षा ४ / ५ में आकर भी न पढ़ पाना शिक्षण से जुडी बड़ी समस्या है| स्कूल बिल्डिंग ठीक करवाकर यह एक नई चिंता मृदुलजी में बनी रही| डाइट मथुरा से उन्हें प्रारंभिक भाषा शिक्षण सर्टिफिकेट कोर्स की जानकारी मिली और उन्होंने इस कोर्स के लिए अपना नामांकन भरा| उन्हें यह अंदेशा था कि शायद इस कोर्स के माध्यम से उन्हें अपनी इस समस्या का हल मिल जाए|
सैद्धांतिक अवधारणाओं के अलावा भाषा शिक्षण के बद्ध और मुक्त कौशलों, प्रिंट चेतना का विकास, इमर्जेंट साक्षरता, ध्वनि जागरूकता या डिकोडिंग के विभिन्न चरण – इन पहलुओं को पास से देखा और समझा| साथ ही उन्हें इन मॉड्यूल की विभिन्न गतिविधियों का संग्रह रोचक एवं प्रभावशाली लगा|

“मासा बहुत कर्मठ है| रविवार वाले दिन भी वह कई बार विद्यालय का निरिक्षण करने चले आते हैं| आज उन्ही के प्रयासों की वजह से गाँव के काफी लोग अपने बच्चों को इस विद्यालय में भेजने को तैयार हो गए है|”
– ग्राम प्रधान प्रतिनिधि

“यह कोर्स वास्तव में एक शिक्षक को भाषा शिक्षण का सटीक मार्ग प्रशस्त करता है| संतुलित भाषा शिक्षण पद्धति के द्वारा नियमित रूप से कराया गया शिक्षण बच्चों की भाषाई समझ को विकसित करने में निश्चित ही सहायक सिद्ध हो रहा है|”
क्षितिज समूह’ मथुरा जनपद के परिषदीय विद्यालयों के विभिन्न विकास खण्डों में कार्यरत 11 प्रधानाध्यापकों द्वारा स्वसंचालित यह एक नवीन और अनूठा समूह है, जिसके वह स्वयं भी एक सदस्य हैं| यह समूह परिषदीय विद्यालयों में शैक्षणिक संवर्धन, स्थानीय समस्याओं व अधिगम-सम्बन्धी समस्याओं पर सकारात्मक कार्य करता है| समूह के द्वारा विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति को नियमित करने हेतु अपने अभिनव एवं नवाचारी कार्यक्रम ‘अध्यापक-अभिभावक चौपाल’ का आयोजन किया जाता है, जहाँ समूह के सदस्यों द्वारा समुदाय / पालकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाता है| इसके अलावा अपने-अपने विद्यालयों में समर-कैंप, सदस्यों के अकादमिक विमर्श हेतु मासिक बैठक आयोजित की जाती हैं|

मृदुलजी ने एल.एल.ऍफ़. कोर्स द्वारा सीखी गयी विभिन्न शिक्षण रणनीतियों को इन बैठकों में साझा किया है| समूह के सभी सदस्य महीने में एक बार मिलते हैं| बैठक का कुछ समय अकादमिक विमर्श के लिए भी होता है| इसके लिए बैठक से पहले सभी सदस्यों के साथ चयनित विषय पर कुछ लेख या पठन सामग्री इन्टरनेट के माध्यम से साझा की जाती है| बैठक के दौरान उस विषय पर चर्चा होती है| इसके बाद पूरे महीने यह सदस्य सीखी गयी रणनीतियों को अपने विद्यालयों में प्रयोग करके देखते हैं, व्हाट्स ऐप ग्रुप पर उसके परिणाम / चुनौती / मुख्य बिन्दू साझा करते हैं और अगली बैठक में अपने अनुभवों पर चर्चा करते है| इन्ही बैठकों के अंतर्गत विभिन्न शिक्षण रणनीतियों जैसे मौखिक भाषा विकास एवं डिकोडिंग की गतिविधियों को साझा किया है|